: राज्य में लेब केडर की उपेक्षा, 268 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत नहीं,मेडिकल लैब टेक्नोलॉजीस्ट के पद. बिलासपुर जिले के 10 वरिष्ठ मेडिकल लेब टेक्नोलॉजीस्ट का जिले से बाहर हुए,,आधे से ज्यादा ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में जाँच सुविधा ठप्प!! जिम्मेदारों पर क्या होगी कार्यवाही??
: Editor : 20-08-2023 : 1188



बिलासपुर--छत्तीसगढ़ राज्य में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीणों को उनके निवास स्थल के पास चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु वर्ष 2005 के बाद कई नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना के स्वीकृति प्रदान करते हुए पद निर्मित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। परंतु विभाग की लापरवाही से इन संस्थानों में अनिवार्य मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी के पद को स्थान नहीं दिया गया। पैथोलॉजी जांच के बगैर इन स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना के अवसर पर ही सवाल उठता है.. मरीजों का लेब जांच अनिवार्य अंग होता है जिसमें गर्भवती माताओं की जांच एनीमिया,शुगर,मलेरिया एचआईवी,पेशाब व अन्य जांच तथा कोविड-19 के समय कोरोनावायरस सैंपल कलेक्शन व जांच।... मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी पद स्वीकृत नहीं होने से ग्रामीण निवास के निकट संस्थान हेतु होते हुए भी लैब जांच हेतु बाहर की ओर रुख करना पड़ रहा है...।


मध्य प्रदेश राज्य के समय स्थापित सभी संस्थानों में सेट अप में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी से पद स्वीकृत है तथा वर्ष 2005 के पूर्व स्थापित सभी 570 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पद स्वीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में यह पद अनिवार्य होता था। शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशानुसार "इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड तथा रूरल हेल्थ स्टैटिसटिक्स" के दिशा निर्देशों के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजीस्ट का पद होता है। वर्तमान में लगभग सभी स्वास्थ्य केंद्रों/चिकित्सा संस्थान में चिकित्सा का यह आलम है कि वर्तमान में सामान्य व आदिवासी क्षेत्रों में बिलासपुर जिले में 18 मुंगेली जिले में 21 जांजगीर-चांपा में 12, शक्ति जिले में 14, बालोद में 15, रायपुर में 17, कांकेर में 12, बलरामपुर रामानुजगंज में 5 जसपुर में 7 अंबिकापुर में 4 कोरिया में 2 सरगुजा में 12 कबीरधाम में लगभग 16 राजनांदगांव में 13 गौरेला पेंड्रा मरवाही में 1 व राज्य के सभी जिलों में यही स्थिति निर्मित हो रही है जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजीस्ट की पद स्वीकृत नहीं है... लेब जांच हेतु सामान्य क्षेत्र में ही नहीं आदिवासी क्षेत्रों में भी स्थापित किए गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी यही स्थिति है।


भ्रष्टाचार का यहां आलम यह है कि राज्य व जिला स्तर से इन मेडिकल लेब टेक्नोलॉजिस्ट पद स्वीकृत विहीन संस्थाओं हेतु लेब सामग्री व उपकरणों की खरीदी भी की गई है तथा सीबीसी मशीन व बायोकेमेस्ट्री जांच मशीन जिन्हें चलाने के लिए ट्रेंड लेब संवर्ग की कर्मचारी की आवश्यकता होती है।प्रश्न है कि जब संस्थान में लेख पद की स्वीकृत नहीं है तब इन महंगी मशीनों की खरीदी क्यों की गई?? राज्य में इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पद स्वीकृत नहीं है की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को भी नहीं है तथा नई नियुक्ति में मेडिकल लेब टेक्नोलॉजीस्ट को इन संस्थानों में नियुक्तियां भी दे दी गई पर सेटअप में पद और स्विकृति को आधार बनाकर ग्रामीण क्षेत्र से लेब टेक्नोलॉजीस्ट जहां सुविधा दे रहे बिलासपुर जिले के ग्रामीण अंचल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलतरा, लखराम, देवरी खुर्द सिरगिट्टी बरतोरी, कडार,ओखर दर्रीघाट, बेलपान, मोच के 10 मेडिकल लेब टेक्नोलॉजिस्ट कर्मचारियों को गौरेला पेंड्रा मरवाही स्थानांतरण कर दिया गया जिससे जिले में अधिक ग्रामीण अंचल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो में लैब जांच सुविधा पूर्णता बंद हो गई है।इसके जिम्मेदार कौन हैं?...ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिम्मेदार अधिकारी इन संस्थानों में लेब जाँच सुविधा उपलब्ध कराने पद सर्जन हेतु गंभीर नहीं है। ग्रामीण अंचल में आम जनता के लेब जांच से वंचित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर राज्य शासन क्या कार्रवाई करती है?? इतने वर्षों तक इस पर संज्ञान नहीं लिया जाना जांच का विषय है।